Khudai Khidmatgaar Abdul Ghaffar Khan (Bacha Khan)- Akhand Bharat ka Saccha Gauravshali Yodha

Raghav Sharan Sharma
ISBN: 9788199024830 Categories: , ,

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ISBN9788199024830

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बाचा खान के लोगों ने स्वाधीनता संग्राम में गोलियाँ खाईं पर पीठ नहीं दिखाई। सीमा प्रांत के पठानों ने राष्ट्रीयता की आग को धधकाया और सुभाष चंद्र बोस से लेकर बरकतुल्ला खान जैसे क्रांतिकारियों ने एकजुटता दिखाई। राजा महेंद्र प्रसाद की अस्थायी सरकार पठानों के संरक्षण में बनी थी और सुभाष को देश से सुरक्षित बाहर भेजने में अहरार पार्टी ने ही बड़ी भूमिका निभाई थी। बाचा खान के लोगों ने राष्ट्रवाद को फैलाकर मजबूती प्रदान की थी। बाचा खान का व्यक्तित्व और त्याग इतना बड़ा था कि लीग की वहाँ 1946 के पहले तक कुछ न चली। बाचा खान को सीमान्त गाँधी कहना उनके व्यक्तित्व को छोटा करना है और एक प्रकार की निंदा है। जिस तरह से राम और कृष्ण सिर्फ अयोध्या और मथुरा तक सीमित नहीं रहे उसी प्रकार बाचा खान भी सिर्फ अफगानों के ही गौरव नहीं थे, वे समस्त भारतीयों के भी गौरव तथा प्रबल राष्ट्रवादी थे। वे सच्चे धार्मिक थे पर धर्म की राजनीति नहीं करते थे।

राघव शरण शर्मा, जन्म 12 सितम्बर 1942, ग्राम सोनडीहा, जिला गया, बिहार। बिहार इन्स्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग। बिहार सरकार के सिंचाई विभाग में 1999 ई. तक पदस्थापित। नौकरी करते किसान आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के कारण, इन्हें सरकार का कोप भाजन बनना पड़ा। अच्छे अभियन्ता के रूप में प्रशस्ति प्राप्त किए। सेवा निवृत्त होने पर मौजूदा राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किए गए। आपकी कुछ अन्य प्रकाशित पुस्तकें- रामचरित मानस में शास्त्रीय संदर्भ; भारत-चीन युद्ध; कश्मीर; जंगे आजादी में मुस्लिम समाज; भारत में स्वाधीनता संग्राम के अनछुए पहलू तथा भारत के भूले बिसरे क्रांतिकारी।

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