Kakori se Naxalbari (काकोरी से नक्सलबाड़ी)

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ISBN 9789350026335
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ISBN 9789350026335

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काकोरी से नक्सलबाड़ी प्रख्यात कम्युनिस्ट क्रांतिकारी शिवकुमार मिश्र (17 अक्टूबर 1914-12 दिसम्बर 2007) के तूफानी राजनीतिक जीवन के पचास वर्षों का लेखाजोखा है। इसे स्वाधीनता आंदोलन के सशस्त्र क्रांतिकारी अध्याय और कम्युनिस्ट क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में 1930 से 1970 के कालखंड के अमूल्य राजनीतिक दस्तावेज की तरह भी पढ़ा-सहेजा जा सकता है I

शिवकुमार मिश्र काकोरी के अमर शहीदों और क्रांतिकारियों से प्रेरित होकर बचपन में ही स्वाधीनता आंदोलन में कूद पड़े थे। 1931 में वे चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह वाले क्रांतिकारी संगठन हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ के सदस्य बने । भूमिगत रहते हुए ही उन्होंने उन्नाव को केंद्र बना कर किसान आंदोलन का सूत्रपात किया । नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ उन्होंने उन्नाव के ग्रामीण अंचलों का दौरा किया । 1938-39 में मिश्र जी ने कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ली और वहां से शुरू करके नक्सलवादी आंदोलन तक आए । अनेक बार जेल गए और भूमिगत जीवन भी बिताया। स्वाधीनता आंदोलन में भी और फिर आजादी के बाद कम्युनिस्ट कार्यकर्ता के रूप में भी 1967 में नक्सलबाड़ी में किसान विप्लव का बिगुल बजने तक वे सीपीआई (एम) की केंद्रीय समिति के सदस्य और उत्तर प्रदेश राज्य समिति के सचिव थे। बाद में सीपीआई (एमएल) में उन्हें केंद्रीय समिति का सदस्य और उत्तर-मध्य अंचल का सचिव चुना गया।

इस समूचे दौर का वस्तुपरक मूल्यांकन मिश्र जी ने अपनी इस आत्मकथा में किया है। उपन्यास जैसी रोचक शैली में लिखी गई यह राजनीतिक आत्मकथा बहुतों को क्रांति की राह पर बढ़ने और वस्तुगत नजरिया अपनाने की प्रेरणा देगी।

शिवकुमार मिश्र (1914-2007) क्रन्तिकारी संगठन हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे! किसान आंदोलन में शामिल होकर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ उन्नाव के ग्रामीण अंचलों का दौरा किया था! फिर कम्युनिस्ट पार्टी, बाद में कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और फिर कम्युनिस्ट पार्टी – मार्क्सवादी लेनिनवादी कि पहली केंद्रीय समिति सदस्य रहे!

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